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सद्बुद्धि और सद्वृत्ति दे दो सद्व्यवहार करें शुभ कर्म गरल-पीयूष एक सागर से सुख-दुख में समभाव वतन प्रभु कल्याण मन विश्वास गृहस्थी वापसी पर माला दिल क़ुर्बान उमंग भटक सकूं न हासिल श्रद्धा मेहनत

Hindi प्रभु पर श्रद्धा Poems